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एक स्कूल ड्रॉपआउट हैं दुनियां की सबसे अमीर महिला, नारी शक्ति की है मिसाल

SUCCESS STORY IN ZHOU QUNFEI

नारी शक्ति

एक स्कूल ड्रॉपआउट हैं दुनियां की सबसे अमीर महिला, नारी शक्ति की है मिसाल

नारी शक्ति से कोई भी अंजान नहीं हैं. जो व्यक्ति सोचते थे की महिलाए कुछ नहीं कर सकती वह सिर्फ घर में रहकर घर का कम कर सकती हैं ,उन सभी लोगो को अपनी अपनी काबिलियत दिखाकर महिलाओ ने बता दिया की वह भी किसी से कम नहीं हैं. यदि कोई महिला चाहे तो दुनिया में ऐसा कोई काम नही जो महिला नहीं कर सकती हैं.

आज हम आपको नारी शक्ति के एक मिसाल बनी महिला की कहानी बताएँगे, जिन्होने अपनी स्कूली शिक्षा को भी पूरा नहीं किया था , लेकिन आज के समय में वह वह अरबपति है. चीन में रहने वाली जो कनफे (Zhou Qunfei) कहानी हर महिला के लिए एक मिसाल और प्रेरणा हैं. जीवन में संघर्ष क्या होता हैं, यह कोई इनसे पुछे, लेकिन कभी भी उन परेशानियों से उन्होने पीछा नहीं छुड़ाना चाहा बल्कि उनका डट कर सामना किया जिसकी बदोलत आज वह इस मुकाम पर पहुच गई हैं.

कैसे बनी कनफे अमीर महिला

45 वर्षीय चीन की बिजनेसमेन महिला है, अपनी काबिलियत से वह दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं में से एक है. टचस्क्रीन निर्माता कंपनी लेंस टेक्नोलॉजी (lens technology) की जो कनफे संस्थापक के साथ सीईओ भी हैं. उनकी यह कंपनी एप्पल, सैमसंग, Huawei जैसी कई कंपनियों को टचस्क्रीन सेंसरों के अलावा कई सारी तकनीकी छीजे मौहेया करती है.

अपनी कंपनी शुरू करने से पहले जो कनफे एक ग्लास कंपनी में फैक्ट्री में महज एक वर्कर के रूप में कार्य करती थी. 1970 में Xiangxiang में जन्मी जो कनफे (Zhou Qunfei) चीन के हुनान नामक क्षेत्र में रहती है. उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था. पिता कुशल कारीगर होने के बावजूद 1960 में अपनी एक उंगली खोने के बाद औद्योगिक दुर्घटना में अपनी आख भी खो चुके थे. जो कनफे जब महज 5 साल की थी, तो उनकी मां भी इस दुनिया को अलविदा कह गई. परिवार की आथिर स्थिति खराब होने के कारण Zhou Qunfei ने 15 वर्ष की उम्र में ही अपना स्कूल छोड़ कर अपने चाचा के साथ रहते हुऐ काम की तलाश शुरू कर दी.

शेन्ज़ेन शहर मे स्थित शेन्ज़ेन विश्वविद्यालय में उन्होने पार्ट टाइम कोर्स करते हुऐ कई कंपनियों के लिए कार्य करना शुरू किया. कोर्स के समाप्त होने के बाद वह फर्म में कार्य करने लगी, जहा घड़ियों के भागों का उत्पादन होता था.

महज तीन महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने उस नौकरी को छोड़ने निश्चय किया और अपने मालिक को इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे को देखकर वहा के निर्देशक काफी प्रभावित हुऐ और उन्हें प्रमोशन की पेशकश कर दी.

अपने चचेरे भाई के द्वारा खुद के बिज़नेस के लिए मिले प्रोत्साहित के चलते 1993 में उन्होने अपनी एक कंपनी का शुभारंभ किया. दो चचेरे भाइयों और स्वयं के भाई ने उनकी इस बिजनेस में काफी सहायता की. 2001 में उनकी कंपनी ने टीसीएल कॉर्पोरेशन के मोबाइल फोन स्क्रीन का कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर सफलता की नई मिसाल खड़ी कर दी.

अपने बड़ते व्यापार को देखते हुऐ 2003 में कनफे ने लेंस टेक्नोलॉजी को लॉन्च कर दिया. आज के समय में उनकी कंपनी नई-नई उचाईयों को छु रही है. लेंस टेक्नोलॉजी के अब करीब 32 कारखाने है, उनकी कंपनियो में 90 हज़ार लोग काम करते है! कनफे करीब 8.4 अरब डॉलर की मालकिन है.

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