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24 लाख बच्चों के लिये मसीहा बना ये 81साल का बुजुर्ग, डॉक्टर भी कहते हैं ‘भगवान का रुप’

प्रेरणात्मक कहानी

24 लाख बच्चों के लिये मसीहा बना ये 81साल का बुजुर्ग, डॉक्टर भी कहते हैं ‘भगवान का रुप’

किसी ने क्या खूब कहा है, “काम करो ऐसा की पहचान बन जाए, हर कदम ऐसा चलो की निशां बन जाए, यंहा जिंदगी तो सभी काट ही लेते हैं, जिंदगी जियो ऐसी की मिसाल बन जाए.”

डॉक्टर के लिये ये शख्स भगवान का रूप है

अक्सर कहा जाता है की डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं. जिस तरह से भगवान लोगों को नया जीवन देते हैं, उसी तरह डॉक्टर उस जीवन को बचाने का काम करते हैं. जब व्यक्ति किसी रोग से ग्रसित हो जाता है तो एक डॉक्टर ही है, जो उसे एक नया जीवनदान देता है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसा शख्स है जिसे डॉक्टर भगवान मानते हैं, और उसे भगवान का दर्जा देने लगे हैं. देना भी बनता है क्योंकि इस 81 साल के बुजुर्ग ने अपने जीवन में 24 लाख बच्चों की जान बचाई है. जब भी किसी बच्चे को किसी बीमारी से बचाना होता है तो सबसे पहले डॉक्टर इस शख्स को ही याद करते हैं. अब आप उस इंसान के बारे में जानना चाहेंगे जो ये कारनामा कर रहा है तो चलिये मिलवाते हैं इस शख्स से आपको…

24लाख बच्चों की जिंदगी के मसीहा

वैसे तो आपने कई बार लोगों को ब्लड डोनेट करते हुए देखा होगा.लेकिन ऑस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति को Man With the Golden Arm कहा जाता है. क्योंकि इस बुजुर्ग ने उस नवजात की जान बचाई है जिनके जीने की किसीको उम्मीद नहीं थी. ये शख्स है 81साल के जेम्स हैरिसन. जो पिछले 60सालों से हर सप्ताह ब्लडडोनेट करते हैं और इतने साल बाद वे अब 81की उम्र में रिटायर हुए हैं. बता दें कि 13 साल की उम्र में जेम्स की छाती की सर्जरी की गई थी, तब रक्तदान की वजह से ही उनकी जान बच पाई थी. इसकी अहमियत समझते हुए उन्होने खुद से वादा किया कि वे बल्डडोनेट कर बच्चों की जान बचाएंगे, तब से अब तक जेम्स अपना ये वादा निभाते चले आ रहे हैं. ऑस्ट्रेलियन रेड क्रॉस ब्लड सर्विस के अनुसार जेम्स ने अब तक 1173 बार रक्त दान कर करीब 24 लाख बच्चों की जान बचाई है.

जेम्स के ब्लड मे है एंटी-डी

ब्लड डोनेट करते वक्त डॉक्टर्स को उनके खून में एक ऐसा एंटीबॉडी मिला, जिनसे एंटी-डी के इंजक्शन बनाये जा सकते थे. जब ये बात जेम्स को पता चली तो साल 1967 से उन्होने हर सप्ताह रक्तदान करना शुरू कर दिया जिससे 30लाख से भी ज्यादा एंटीडी इंजक्शन जरूरतमंद मांओं को दिए जा चुके हैं. Anti-D में मां के गर्भ में पलने वाले बच्चों को ब्रेन डैमेज और HDFN जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. ऑस्ट्रेलिया में पिछले 60 सालों से लाखों बच्चे जो किसी न किसी बीमारी की वजह से मां के गर्भ में ही मर जाते, लेकिन हैरीसन की खून की वजह से कई बच्चे अपनी जिंदगी जी रहे है.

81साल में ले लिया रिटायरमेंट

आज लाखों की जिंदगियां बचाने वाले जेम्स देश का गौरव हैं. जो ऑस्ट्रेलिया का नेशनल हीरो कहा जाता है, अपने इस परोपकार के लिये उन्हे ढेरों अवॉर्डस मिल चुके हैं. लेकिन जेम्स अब 81साल के हो चुके हैं और उन्हे रक्तदान के लिये मना कर दिया गया है. मगर जेम्स का कहना है कि वे अभी भी रकतदान कर सकते हैं अगर डॉक्टर उन्हे इजाजत दें.

रक्तदान है महादान

तो दोस्तों, रक्तदान को महादान इसलिये कहा जाता है क्योंकि इससे हर दिन किसी न किसी की जिंदगी बच सकती है. भारत में हर 2 सेकेंड में किसी न किसी व्यक्ति को ब्लड की जरूर होती है. लेकिन हमारे देश में बहुत कम लोग है जिनको इसकी अहमियत पता है. मगर इस कहानी को पढ़कर शायद कई लोगों को इसका महत्व पता चल जाए और वे भी रक्तदान को महादान समझने लगें.

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