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देश की नंबर 1 आईटी कंपनी टाटा समूह के चेयरमैन,जानें इनकी सफलता की कहानी

प्रेरणात्मक कहानी

देश की नंबर 1 आईटी कंपनी टाटा समूह के चेयरमैन,जानें इनकी सफलता की कहानी

पढ़ाई बीच में ही छोड़ जो कभी खेती करने के लिए मजबूर किये गये थे ,वो आज हैं देश की नंबर 1 आईटी कंपनी टाटा समूह के चेयरमैन,जानें इनकी सफलता की कहानी

ऐसा अक्सर होता है की हमे लोगो की सफलता तो नजर आ जाती है लेकिन उस सफलता को हांसिल करने के लिए किये गये मेहनत और लग्न के बारे में बहुत कम ही लोग जानना चाहते है |आज टाटा कंपनी किसी परिचय की मोहताज नहीं है बच्चा बच्चा इस नाम से अच्छे से वाकिफ है लेकिन हममे से बेहद कम लोग ही इस बात को जानते होंगे की कभी देश की नंबर वन आइटी कंपनी के चेयरमैन और आज पूरे टाटा समूह के शीर्ष पद पर बैठे नटराजन चंद्रशेखरन पिता की इच्छा के अनुसार अपनी पढ़ाई-लिखाई बीच में ही छोड़कर खेती-किसानी करने लगे थे।

लेकिन शायद इन्होने कभी भी अपने हिम्मत और हौंसले को टूटने नहीं दिया और समय के साथ चलते गयेऔर फिर क्या था जैसे हम रात के बाद एक नया सवेरा होता है ठीक वैसे ही इनके समय ने भी करवट ली, वह फिर अध्ययन में जुटे और तब से आज तक उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आपको इस महान शख्सियत के बारे में एक बात जानकर बेहद हैरानी हो सकती है क्योंकि जहाँ आज के समय में हर कोई खुद को लोगो के सामने प्रेजेंट करने के लिए मीडिया ,का सहारा लेता है वही इन्हें मीडिया के साथ ज्यादा मेलजोल करना नहीं सुहाता और इन्हें फोटोग्राफी करने का बिह बड़ा शौख था |

जानकरी के लिए बता दे सायरस मिस्त्री को टाटा के चैयरमैन पद से हटाए जाने के बाद जारी उपापोह की स्थिति को खत्म करते हुए टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के सीईओ तथा मैनेजिंग डायरेक्टर नटराजन चंद्रशेखरन को टाटा संस का नया चेयरमैन बनाया गया है| 100 अरब अमेरिकी डॉलर के टाटा समूह को नियंत्रित करने वाली होल्डिंग कंपनी टाटा के नए चैयरमैन के तौर पर अब सभी की निगाहें 53 साल के नटराजन पर टिकी हुई है |

आपको बता दे एक वक्त वह था, जब टाटा समूह के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन टीसीएस में एक गुमनाम कर्मचारी हुआ करते थे |उस वक्त उनकी पहचान मात्र इतनी थी की वे तमिलनाडु में नम्क्कल के पास मोहनुर गांव के कृषक श्रीनिवासन नटराजन के पुत्र नटराजन चंद्रशेखरन है |इनकी सिक्षा की बात करे तो इन्होने एम्प्लाइड साइंस में स्नातक शिक्षा लेने के बाद तिरुचिरापल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मास्टर डिग्री हांसिल की है |

आज हम आपको नटराजन चंद्रशेखरन के उन संघर्षों के विषय में बताने वाले है जिनके विषय में अब तक आप अंजान है |बता दे नटराजन चंद्रशेखरन ने एक इंटरव्यूल में बताया था कि जब वे कॉलेज में पढाई करते थे उस समय उनके पिता एक लॉयर थे, लेकिन दादा के गुजर जाने के बाद उन्होंसने अपनी नौकरी छोड़ दी और किसानी शुरू कर दी और हमे भी किसान बनाना चाहते थे और उस वक्त मेरे और सभी भाई अलग-अलग शहरों में अपनी-अपनी नौकरियां शुरू कर दीं और जब मेरी पढाई पूरी हुई तब मेरे पास पिता जी के खेती बाड़ी के काम सँभालने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नजर ही नहीं आ रहा था जिसके कारण मै अपने पिता जी के साथ ही खेतों में काम करने लगा

चंद्रशेखर जी ने बताया की पिता के साथ खेतों में काम करना मेरी मजबूरी थी लेकिन इस काम में जरा भी मन नहीं लगता था और मेरे हाव भाव देखकर पिता जी भी समझ गये थे की मेरे मन में कुछ और चल रहा है और मै अपने पिता जी से अपनी बाते बताने में हिचकिचाता था की वे पता नहीं मेरी बातों को समझेंगे या नहीं या फिर वे मुझे और भी ज्यादा गलत समझ लेंगे इसी वजह से मै छुप रहा और ऐसे ही धीरे धीरे कुछ महीने बीत गये

फिर एक दिन पिता की निगाहों ने मुझे पकड़ लिया और मेरे पिता ने जान लिया कि मेरे के मन में कुछ चल रहा है, जिसे वह साझा करने में हिचकिचा रहा है। फिर क्या था, पिता ने उनसे पूछ ही लिया कि आखिर तुम चाहते क्या हो?

अब जब पिता ने कोई सवाल किया है तो बेटे में इतनी हिम्मत कहां कि वह पिता से कोई बात छिपा ले जाए। चंद्रशेखरन के मुंह से निकल गया कि वह अभी और पढ़ाई करना चाहते हैं। पिता ने बात मान ली और वह आगे के जीवन की राहों पर निकल पड़े। और आज वो इस मुकाम पर पहुँच चुके है|

आपको जानकर हैरानी होगी की चंद्रशेखरन टाटा समूह के चेयरमैन बनने वाले पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी टाटा समूह में कोई हिस्सेदारी नहीं है। वह बिना किसी हिस्सेदारी के ही सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी समूह के चेयरमैन बनने वाले वह पहले गैर पारसी व्यक्ति हैं। उन्होंने टीसीएस को उस वक्त शीर्ष पर पहुंचाया, जब टाटा समूह की मुख्य कंपनियां टाटा स्टील और टाटा मोटर्स कुछ खास नहीं कर पा रही थीं।

नटराजन चंद्रशेखरन सन 1987 में वह टीसीएस में एक सॉफ्ट वेयर इंजीनियर के रूप में जुड़े और वर्ष 2002 आते-आते वह टीसीएस के ग्लोबल सेल्स हेड बन चुके थे। इस दौरान उन्होंने कंपनी में कई सारे तकनीकी बदलाव करवाए । प्रतिफल ये हुआ कि टीसीएस देश की आईटी कंपनियों की सिरमौर बन गई। आज उनकी पहचान देश के शीर्ष सफल उद्यमियों में है। चंद्रशेखरन कहते हैं कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान की बात और टाटा परिवार का हिस्सा होना मेरे गर्व का विषय है। ग्रुप को एकजुट कर उनका मुख्य काम टाटा के बिजनेस का पूरे समाज पर छाप छोड़ना है।

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