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खुद को आग के हवाले करने के बाद समझ आया जिंदगी का असली मकसद, आज करती है जली हुई औरतों की इस तरह से मदद

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खुद को आग के हवाले करने के बाद समझ आया जिंदगी का असली मकसद, आज करती है जली हुई औरतों की इस तरह से मदद

आज के समय में महिलाओं को जितनी प्रताड़ना सहनी पड़ती है उतना शायद ही उतना कोई और सहता हो फिर भी महिलाये त्याग की मूरत बन अपने परिवार के खातिर अपनी जान तक न्योछावर करने में जरा भी पीछे नहीं हटती |हमारे समाज में महिलाओं का सबसे बड़ा दुश्मन है दहेज़ प्रथा जिसके कारण न जाने कितनी मासूम लड़कियों की जिंदगी आग के हवाले कर दिया जाता है उन्हें प्रताड़ित किया जाता है जिसके चलते वे जिंदगी से हारकर खुदबखुद मौत को गले लगा लेती है लेकिन उसमे उन महिलाओं की क्या गलती होती है जो अपना सबकुछ छोड़ कर आपने ससुराल आती है इस उम्मीद से की उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू होगा लेकिन हमारे समाज के दहेज़ के लोभी इस महिलाओं की जिंदगी शुरू होने से पहले ही उन्हें मौत के घाट उतार देते है |इसका अंत कब होगा ये तो नहीं पता लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताने वाले है जिसे दहेज़ के लिए इतना प्रताड़ित किया गया की उसने हारकर मौत को गले लगाया लेकिन शायद मौत को करीब से देखने के बाद ही उसे समझ में आ गया की उसकी जिंदगी का असली मकसद क्या है जिसे वो खत्म करने जा रही।

आज के समय में कम उम्र में किसी अंजन व्यक्ति के साथ शादी के बंधन में बंध जाना किसी लड़की के लिए किसी बड़े अपराध की सजा से कम नहीं है। और वही यदि उसका पति उसे मानसिक और शारीरिक दोनों ही प्रकार से प्रताड़ित करे तब तो उस लड़की का जीवन बिलकुल ही असम्भव सा लगने लगता है ऐसे में मौत को गले लगाना ही सरल लगने लगता है लेकिन अगर आत्महत्या करने की कोशिश मौत की हार हो जाये और बचा हुआ जीवन शारीरिक विकलांगता के साथ गुजरना पड़े फिर तो जीवन और भी कष्टदायी बन जाता है।

आज हम आपके सामने निहारी मंडली के जीवन की कहानी प्रस्तुत करने वाले है जिनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ जैसा हमने आपको ऊपर बताया है। आज हम आपको बताएँगे की किस तरह से निहारी जीवन से हारकर मौत को गले लगायी जिसमे वे असफल हो गयी उसके बाद उन्होंने कसी तरह से जिंदगी को जिन्दादिली से जीना शुरू किया।

आज से 8 साल पहले बदकिस्मती से निहारी की शादी एक ऐसे शख्स के साथ हो गयी जो स्वस्थ होते हुए भी घर में लेटे लेटे मल मूत्र का त्याग करता था और निहारी से उसे साफ़ करवाता था जो की उसकी आदत बन चुकी थी। इसके अलावा वो निहारी को मानसिक और शारीरिक रूप दोनों ही तरह से बुरी तरह से प्रताड़ित करता था जिसके वजह से निहारी काफी परेशान रहने लगी।अपने पति की इन घोर यातनाओं से तंग आकर निहारी अपने मायके की तरफ रुख किया लेकिन मायके वालों ने भी भारतीय नारी का बलिदान ,सहनशीलता ,लोक लज्जा आदि का उदाहरण देकर वापिस भेज दिया।

निहारी को समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। उनका पति उन्हें हर रोज मारता पीटता और तरह-तरह की यातनाएं देता। इससे तंग आकर एक दिन निहारी ने गलत कदम उठा लिया। उन्होंने अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया। कुछ ही पलों में उनका पूरा शरीर जलने लगा। जिस वक्त उन्होंने आग लगाई उस वक्त वह गर्भवती थीं। आग की लपटों ने उन्हें बुरी तरह झुलसा दिया था। जिसके बाद उनका बचना मुश्किल था।

लेकिन शायद अब निहारी को समझ में आ गया था कि अब उनकी जिंदगी ऐसे ही चलने वाली है। अस्पताल में उनका इलाज तो हुआ लेकिन उन्हें कई सारी सर्जरी से गुजरना पड़ा। अब निहारी ने सोच लिया था कि वे अपनी बाकी जिंदगी दूसरों के लिए कुर्बान कर देंगी। उन्होंने अपनी जिंदगी की कहानी से दूसरों की जिंदगी रोशन करने का फैसला किया। 9 अलग-अलग बड़ी सर्जरी और महीनों तक अस्पताल के बेड पर बिताने के बाद निहारी ने अपनी जिंदगी को वापस सामान्य करने की कोशिश की।

निहारी ने 28 साल की उम्र में एक एनजीओ खोला। वह अपने ही जैसी कई स्त्रियों की मदद करना चाहती थीं। इस मकसद से उन्होंने एक ट्रस्ट की शुरुआत की जिसा नाम ‘बर्न सर्वाइवर सेवियर ट्रस्ट’ है। आंध्रप्रदेश के पुल्लिगुड़ा गाउन में रहने वाली निहारी अब हैदराबाद में रहती हैं। इस हादसे के कुछ ही साल बाद उन्होंने अपने पति से तलाक लिया और अलग हो गईं। साथ ही साथ उन्होंने कॉरेस्पोंडेंस से पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई भी की।

निहारी द्वारा शुरू किये गए “बर्न सर्वाइवर मिशन सेवियर ट्रस्ट” का मकसद ऐसी ही दूसरी औरतों को वापस एक नई जिंदगी जीने की उम्मीद देना है। पिछले दिनों में यह संस्था फैशन शो के ज़रिये इन महिलाओ को स्पॉटलाइट में लाने का काम कर रही है। इतना ही नहीं बल्कि मुफ्त इलाज द्वारा निहारी की कोशिश है कि वह उन सारी महिलाओ को सक्षम बना सके जो खुद को इस हादसे के बाद बोझ समझती हैं। निहारी कहती हैं कि ज़िन्दगी की ये मुश्किलें कभी उनके हौसलों को नहीं तोड़ सकीं। उनका मानना है की जंग जीतने का मतलब दुश्मन का विनाश नहीं बल्कि जंग जीतने का सही मतलब दुश्मन को जीतना होता है। तमाम अवार्ड की विजेता रही निहारी को हाल ही में “लेडी लेजेंड्स ऐकलेड” का खिताब हासिल हुआ है।

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