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कैसे एक इंदौर बन गया स्वच्छ इंदौर, जानिए पूरी कहानी

Story of becoming Indore clean

सफलता की कहानी

कैसे एक इंदौर बन गया स्वच्छ इंदौर, जानिए पूरी कहानी

इंदौर शहर एक समय जिसे आबादी वाला और गंदगी वाले शहर के नाम से जाना जाता था, आज वही शहर सबसे स्वच्छ शहर के नाम से जाना जाता है. इंदौर शहर आज के समय में देश का नंबर वन स्वच्छ शहर है. किसी ने भी इस बात की कल्पना भी नहीं की होगी कि जिस शहर में खुले में शौच हर तरफ गंदगी रहती थी, वह शहर इतना साफ स्वच्छ भी हो सकता है, यही नहीं देश में स्वच्छता के मामले में नंबर वन पर भी आ सकता है. श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के आत्मविश्वास दृढ़ संकल्प एवं नागरिकों के प्रति सदव्यवहार के चलते इंदौर शहर की जनता और अपने कर्मचारियों के सहयोग से देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने में वह सफल हुए हैं.

जब शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से इंदौर शहर को देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया तो किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि इंदौर शहर को यह उपाधि प्राप्त होगी, लेकिन श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के नेतृत्व में यह काम सफल हुआ और इंदौर शहर देश का सबसे स्वच्छ शहर बन गया.

स्वच्छता के मामले में इंदौर शहर 2015 में 180 वें पायदान पर था 2016 में घर को 25 वीं रैंकिंग प्राप्त हुई लेकिन 2017 इंदौर शहर के लिए लकी साबित हुआ और इसी वर्ष इंदौर शहर को 434 शहरों में देश का सबसे स्वच्छ शहर मानते हुए स्वच्छता के मामले में नंबर वन स्थान प्राप्त हुआ.

Story of becoming Indore clean

इंदौर को यह गौरव सिर्फ और सिर्फ मालिनी गौड़ के विश्वास और इंदौर शहर की जनता के द्वारा इस अभियान को मैं अपना अहम योगदान देने और नगर निगम कर्मचारियों के द्वारा किए गए प्रयास की बदौलत थी इंदौर नंबर वन बन पाया है. इस काम के लिए एक हजार से भी ज्यादा शहर से कचरा पेटीयों को उठाया गया और शहर को स्वच्छ बनाने के लिए डोर टू डोर कचरा लेने के लिए कचरा वाहन प्रारंभ किए गए.
समस्त कार्य की मॉनिटरिंग खुद मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ ने की जो कोई भी स्वच्छता के मामले में वहां के कर्मचारी यदि लापरवाही करते थे तो वह सख्त एक्शन लेती थी. मालिनी गौड़ को भी इस बात का यकीन नहीं था कि इंदौर को स्वच्छता में प्रथम स्थान मिल जाएगा.

लगाया जुर्माना

घर में हर तरफ खुले में शौच गंदगी करने या थूकने पर जुर्माना लगाया गया, ताकि आम जनता इससे सबक लेते हुए शहर में गंदगी ना करें उनके द्वारा लगाए गए जुर्माने के चलते काफी धनराशि भी जमा हुई जिसे स्वच्छ अभियान में लगाया गया. जो व्यक्ति थी खुले में शौच करता गंदगी करता तो उस पर जुर्माना लगाया जाता ताकि भविष्य में वह ऐसी हरकत दोबारा ना करें. मालिनी गौड़ ने इंदौर शहर को स्वच्छ बनाने का संकल्प उसी दिन ले लिया था जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को स्वच्छ भारत बनाने का संकल्प लिया था तभी से उन्होंने इंदौर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का प्रण लिया था, जिसे उन्होंने पूरा किया.

इंदौर को स्वच्छ बनाने के बाद मालिनी गौड़ का अगला लक्ष्य इंदौर शहर की सड़कें हैं, वह चाहती है कि यहां की सड़कें इतनी साफ-सुथरी हो की सड़क पर बैठकर खाना खाया जा सके. शहर को प्रथम स्थान पर बनाए रखने के लिए वह लगातार और भी प्रयास करते जा रहे हैं ताकि इंदौर शहर से स्वच्छता के मामले में प्रथम स्थान कोई नहीं सके.

खुले में शौच पर रोक

इंदौर शहर में आम जनता द्वारा खुले में की जाने वाली शौच स्वच्छता के मामले में सबसे बड़ा कारण था जिससे दूर करना बहुत ही कठिन था. इंदौर को स्वच्छ बनाने का सबसे पहला काम आम जनता को खुले में शौच करने से रोकना था जिसके लिए रोको और टोको अभियान को शुरू किया गया. अभियान के तहत खुले में शौच करने वाले व्यक्तियों को रोकना था और उन्हें खुले में शौच करने के नुकसान के बारे में भी बताना था. इस समस्या से निपटने के लिए इंदौर शहर में कई शौचालय और मूत्रघर को बनवाया गया ताकि इस समस्या से निजात पा सकें.

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