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कभी गूंगी गुड़ियाँ कहलाने वाली आयरन लेडी, कैसे बनी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री

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कभी गूंगी गुड़ियाँ कहलाने वाली आयरन लेडी, कैसे बनी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री

कभी गूंगी गुड़ियाँ कहलाने वाली आयरन लेडी, कैसे बनी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री

भारत की प्रथम और चौथी महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं. इंदिरा गांधी भारतीय राजनीति में अपनी अहम चाप छोड़ी साथ ही विश्व राजनीति के क्षितिज पर भी विलक्षण प्रभाव बनाया था. शयद इसी के चलते उन्हें आयरन लेडी के नाम से संबोधित किया जाता है.

इंदिरा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की बेटी थीं. नेहरु जी के प्रधानमंत्री पड़ पर रहते हुए ही उन्होंने राजनीती में अपनी पैठ बना ली थी. राजनैतिक नेता के तोर पर इंदिरा जी को निष्ठुर माना जाता है.

इंदिरा गाँधी ऐसी पहली महिला थी जिन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए प्रशासन का आवश्यकता से अधिक केन्द्रीयकरण किया. इंदिरा गाँधी के शासनकाल में हमारे देश में आपातकाल लागू हुआ था.

जिसके अंतर्गत सभी राजनैतिक प्रतिद्वंदियों को जेल की हवा कहानी पड़ी थी. भारत के संविधान में जितना इंदिरा के राज में मूल स्वरुप का संसोधन किया गया था उतना कभी भी नहीं किया है.

आयरन लेडी

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इंदिरा के शासनकाल के दौरान ही बांग्लादेश के मुद्दे पर भारत-पाक युद्ध प्रारंभ हुआ था. इस युद्ध में बांग्लादेश का जन्म हुआ था. इंदिरा गाँधी ने पंजाब से पूर्ण रूप से आतंकवाद का खात्मा करने के लिए स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार को चलाया गया था. इस ऑपरेशन के कुछ महीनों बाद ही उन्ही के अंगरक्षकों ने इंदिरा की हत्या कर दी थी.

प्रारंभिक जीवन

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पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु जी की बेटी इंदिरा गांधी उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में 19 नवंबर 1917 को जन्म हुआ था. पिता ने उनका नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी रखा था. पिता जवाहरलाल और दादाजी मोतीलाल एक सफल वकील थे. जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था. इंदिरा गाँधी की माताजी का नाम कमला नेहरु था.

विरासत में मिला व्यक्तित्व

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दादा के द्वारा दिए गए नाम इंदिरा होने के बावजूद पिता की अत्यंत प्रिय इंदिरा को पंडित नेहरु प्यार से प्रियदर्शिनी के नाम से बुलाते थे. आकर्षक व्यक्तित्व विरासत के रूप में इंदिरा को मिला था.

राजनैतिक माहौल

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पिता के राजनैतिक काम होने और मां के ख़राब स्वास्थ्य के चलते उन्हें सही शिक्षा का माहौल नहीं प्राप्त हुआ था. घर पर हमेशा राजनैतिक कार्यकर्ताओं के आने-जाने के चलते घर का वातावरण पढ़ाई के बिलकुल भी अनुकूल नहीं था. इस परेशानी को देखते हुए नेहरु जी ने उनकी शिक्षा का प्रबंध घर पर ही कर दिया था.

नहीं मिली दक्षता

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इंदिरा को सिर्फ अंग्रेजी के अलावा अन्य किसी भी विषय में विशेष दक्षता प्राप्त नहीं हुई. रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित किए गए शांति निकेतन के विश्व-भारती में इंदिरा गाँधी पढ़ने के लिए चली गई. बाद में उन्होंने लन्दन में अध्ययन कर अपनी पढ़ाई पूरी की. लेकिन पढ़ाई में विशेष दक्षता न होने के चलते वह औसत दर्जे की छात्रा ही रह गई.

फिरोज़ गाँधी से मुलाक़ात

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जब इंदिरा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढाई करती थी तो उनकी मुलाकात फिरोज़ गाँधी से होती रहती थी. जो उन दिनों लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में अपनी पढ़ाई कर रहे थे.

इंदिरा गाँधी और फिरोज़ गाँधी की शादी

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पढ़ाई पूरी करने के बाद इंदिरा गाँधी ने फिरोज़ गाँधी को अपना हमसफ़र बना लिया. दोनों ने 16 मार्च 1942 को आनंद भवन इलाहाबाद में शादी कर ली.

वानर सेना का गठन

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बचपन से ही राजनैतिक माहौल में पली इंदिरा का मन भी राजनीती को और प्रभावित हुआ इंदिरा ने लड़के-लड़कियों की मदद से एक वानर सेना का गठन किया. उनकी यह सेना विरोध प्रदर्शन के साथ झंडा जुलूस एवं प्रतिबंधित सामग्रीओं का परिसंचरण करती थी.

भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन

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लन्दन से अपनी पढाई कर वह 1941 में वापस भारत लौट आयीं. भारत आने के बाद वह भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में शामिल हो गयीं. आंदोलन के चलते 1942 में उन्हें गिरफ्तार किया गया.

पाकिस्तान के शरणार्थियों की देखभाल

देश के विभाजन के बाद दंगों के चलते इंदिरा ने शरणार्थी शिविरों को संगठित कर पाकिस्तान से आये शरणार्थियों की देखभाल का जिम्मा लिया था.

राजनैतिक जीवन

इंदिरा को राजनीतिक विचारधारा तो विरासत में ही प्राप्त हुई थी. पिता के प्रधानमंत्री बनने के बाद वह उनकी काफी मदद करती थी. पिता की स्याहता करते करते उन्हें राजनीति की काफी समझ हो गयी. कांग्रेस पार्टी ने 1955 में अपने दल में शामिल कर लिया.

बन गई कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस पार्टी में धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता रहा और 42 वर्ष की उम्र में वह कांग्रेस की अध्यक्ष बन गईं.

पंडित नेहरू की म्रत्यु 

1964 में पंडित नेहरू के स्वर्गवास होने के बाद इंदिरा ने चुनाव जीतकर शाष्त्री सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री का पद प्राप्त किया. नए दायित्व का उन्होंने बखूबी से निर्वाहन किया.

बन गई प्रधानमंत्री

इंदिरा गाँधी एक दो बार नहीं बल्कि 4 बार भारत की प्रधानमंत्री का पद संभाल चुकी है. इंदिरा ने (1966-1977) लगातार तीन बार प्रधानमंत्री का पद संभाला तो चौथी बार (1980-84) में संभाला.

ऐसे बनी प्रधानमंत्री

1966 में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी की अचानक हुई अकस्मात् मृत्यु के बाद इंदिरा गाँधी को भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए नियुक्त किया गया.

कब से कब तक बनी प्रधानमंत्री

बहुत ज्यादा ही कम बहुमत से इंदिरा गाँधी1967 के चुनाव में जीत कर प्रधानमंत्री बनीं थी.

सन 1971 में भारी बहुमत प्राप्त कर इंदिरा पुनः प्रधानमंत्री बनी और 1977 तक इस पद पर कबिज रहीं.

इंदिरा गाँधी की मृत्यु

इंदिरा गाँधी ने पंजाब से पूर्ण रूप से आतंकवाद का खात्मा करने के लिए स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार को चलाया गया था. ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के महज पाँच महीने के बाद 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गाँधी को उनके ही दो सिक्ख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

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